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30 MAY 2020

विदेश नीति में मोदित्व

Dr. Hemant Pandya


2014 के लोकसभा चुनावों में श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी ने ऐतिहासिक सफलता प्राप्त की और पूर्ण बहुमत की सरकार बनायीं थी । 2019 के लोकसभा चुनावो में अपनी इस जीत को दोहराकर श्री नरेन्द्र मोदी दूसरी बार भारत के प्रधानमंत्री बने । 26 मई को मोदीजी के नेतृत्व वाली सरकार के 6 वर्ष पूरे हो चुके हैं । इन छह वर्षो में मोदीजी ने वर्तमान की आवश्यकताओं के अनुरूप राष्ट्र की विदेश नीति में कई बदलावों का आगाज किया हैं । भारत के प्रथम प्रधानमन्त्री श्री जवाहर लाल नेहरु के बाद श्री नरेंद्र मोदी दूसरे ऐसे प्रधानमंत्री हैं जो विदेश मन्त्रालय में सर्वाधिक रूचि रखते है। श्री नरेन्द्र मोदी ने अपने प्रथम कार्यकाल में विदेशमंत्री स्वर्गीय श्रीमती सुषमा स्वराज को बनाया । श्रीमती सुषमा स्वराज भारत की प्रथम पूर्णकालिक महिला विदेश मंत्री थी । उन्होंने विदेश मंत्रालय को संवेदनशील और 24 घन्टे सक्रिय मन्त्रालय बना दिया । सोशल मिडिया पर वह स्वय सक्रिय रहती थी और हर समय पीड़ित मानवता की सेवा के लिए तत्पर रहती थी । मोदीजी ने दूसरे कार्यकाल के लिए श्रीमती सुषमा स्वराज का उत्तराधिकारी श्री एस. जयशंकर को चुना जोकि भारत के विदेश सचिव रह चुके हैं ।

             प्रथम कार्यकाल  के प्रारंभिक दिनों में  प्रधानमंत्री  विदेश यात्राओ के कारण अधिक चर्चा में रहे थे ।  उनके प्रथम कार्यकाल के प्रारंभिक वर्षों में उनके द्वारा अधिक विदेश यात्राएं की गई थी, वही बाद के वर्षों में विदेश यात्राओं की संख्या में कमी दिखाई देती है। PMO की वेबसाइट के अनुसार नवंबर 2019 तक प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने कुल 59 विदेश यात्रा की थी । जिनमें से 49 विदेश यात्राएं उनके प्रथम कार्यकाल से जुड़ी हुई हैं । भारत के प्रधानमंत्रियो में सर्वाधिक विदेश यात्रा करने वाली प्रधानमंत्री श्रीमती इन्दिरा गाँधी हैं । श्रीमती इन्दिरा गाँधी ने अपने तीन कार्यकालों में कुल 115 विदेश यात्राये की थी । पूर्व प्रधानमंत्री डॉ.मनमोहनसिंह ने अपने दो कार्यकाल में कुल 73 विदेश यात्राये की थी । इस तरह विदेश यात्रा करने के क्रम में श्री मोदी भारतीय प्रधानमंत्रियो में अब तक तीसरे स्थान पर हैं ।
उदारीकरण और वैश्वीकरण के युग में राष्ट्रों के आपसी सम्बंधो को पूरी तरह बदल दिया हैं । राष्ट्रों की परस्पर निर्भरता बढ़ गयी हैं । इन्टनेट और सूचना प्रोद्योगिकी के इस युग में कोई भी देश एक दुसरे से अछूता नहीं रह सकता हैं । न केवल व्यापार और वाणिज्य बल्कि आतंकवाद और महामारियों का भी वैश्वीकरण हुआ हैं । कोरोना वायरस से उपजी वर्तमान स्थिति इसका प्रमाण हैं । इनका सामना करने और समाधान करने के लिए उच्च स्तर पर राष्ट्रों के मध्य समन्वय और चर्चा आवश्यक हैं । जिससे कि पूरे विश्व के लिए एक सामूहिक नीति को निर्धारित कर आपसी विवादों और समस्याओ का समाधान किया जा सके । बदलते विश्व में अनेक नवीन अन्तराष्ट्रीय संगठनों को जन्म दिया हैं । भारत भी ब्रिक्स,जी-20,शंघाई कापोरेशन संगठन आदि का सदस्य बना हैं । इन अंतराष्ट्रीय संगठनों के शिखर सम्मेलनों में राष्ट्राध्यक्ष शामिल होते हैं । ये सम्मलेन राष्ट्राध्यक्षो को एक-दुसरे को समझने, आपसी विश्वास तथा समन्वय बनाने में सहायक होते हैं । इन सम्मेलनों ने विश्व के सभी देशो के राष्ट्राध्यक्षो के विदेश दौरों की संख्या में बढ़ोतरी की हैं । वन टू वन टॉक और राष्ट्राध्यक्षो के साथ इनफॉर्मल (अनोपचारिक सम्मिट) जैसे विदेश नीति के नये तौर तरीको ने भी राष्ट्राध्यक्षो के विदेश दौरों की संख्या में बढ़ोतरी की हैं । प्रधानमंत्री मोदी की इन विदेश यात्राओ ने भारत को अंतराष्ट्रीय मंच पर उभार दिया और कई देशो ने भारत से संबंधो को विस्तार देकर नये आयाम दिए । भारत और फ़्रांस के सम्बंधो का विस्तार इसका बेहतरीन उदाहरण हैं ।
इयान हॉल की पुस्तक ‘मोदी एंड रिइंवेंशन इंडियन फॉरेन पॉलिसी' के अनुसार मोदी डॉक्ट्रिन या विदेश नीति का वैचारिक आधार हिंदू राष्ट्रवाद है और जिसकी प्रेरणा विश्व गुरु के रूप में भारत को स्थापित करना है । श्री मोदी अपने विदेश दौरों में अक्सर प्राचीन मंदिरों में दर्शन के लिए जाते हैं । इसी प्रकार भारत आने वाले विदेशी राष्ट्राध्यक्षो के कार्यक्रमों के लिए सांस्कृतिक और ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण स्थलों का चयन करते हैं । जापान के प्रधानमंत्री की बनारस यात्रा या चीनी राष्ट्रपति श्री जिंनफिंग का महाबलीपुरम यात्रा इसी के प्रमाण हैं । प्रधानमन्त्री अंतराष्ट्रीय कार्यक्रमों में उद्बोधन हिन्दी में देते हैं और संस्कृत कि सदुक्तियो का प्रचुर प्रयोग करते हैं । उन्ही के प्रयासों का परिणाम हैं की संयुक्त राष्ट्र संघ की महासभा ने 2014 में 21 जून को विश्व योग दिवस घोषित किया । 21 जून 2015 से प्रतिवर्ष पूरे विश्व में योग दिवस मनाया जाता हैं । इस तरह के आयोजनों आम भारतीयों में विश्वास और संस्कृति के प्रति गौरव का भाव पैदा करते हैं ।
मोदी डॉक्ट्रिन में विदेशों में बसे प्रवासी भारतीयों को विशेष महत्व है । प्रधानमंत्री मोदी प्रवासी भारतीयों को भारत का सांस्कृतिक दूत कहते हंी और अपनी विदेश दौरों में प्रवासी भारतीयों की सम्मेलनों में अक्सर शामिल होते हैं । इन भव्य कार्यक्रमों में भारतीय संस्कृति की झांकी होती हैं साथ ही उभरते भारत का आत्म विश्वास भी झलकता हैं । सितम्बर 2019 में इसी तरह का एक कार्यक्रम अमेरिका के ह्यूस्टन में आयोजित किया गया था । ‘हाउडी मोदी' नाम के इस कार्यक्रम में पचास हजार प्रवासी भारतीयों ने हिस्सा लिया था । इस कार्यक्रम में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी शामिल हुए थे । इसी तरह के आयोजन अन्य देशों की प्रभावशाली राष्ट्राध्यक्षो के भारत आगमन पर भी किए जाते हैं ।जैसे कि श्री डोनाल्ड ट्रंप की भारत यात्रा के समय फरवरी 2020 में अहमदाबाद में ‘नमस्कार ट्रम्प' का आयोजन किया गया । जिसमे एक लाख से अधिक भारतीय शामिल हुए थे । इस तरह के आयोजन जहाँ राष्ट्रों के मध्य भावनात्मक सम्बन्ध को सुदृढ़ करते हैं वही विविधतामयी भारतीय संस्कृति का प्रसार करते हैं ।
विदेश नीति में मोदीत्व सशक्त नेतृत्व और त्वरित निर्णय के रूप में झलकता हैं, जो संकट को भी अवसर बनाने में विश्वास करता हैं । मोदी कालीन भारत प्रवासी भारतीयों की सुरक्षा और आवश्यकता पड़ने पर उनकी सुरक्षित घर वापसी के लिए सदैव तत्पर दिखाई देता हैं । 2015 में यमन संकट के समय ‘ऑपेरशन राहत' द्वारा भारतीय सेनाओ ने 4640 भारतीयों और 960 विदेशी मूल के लोगो को सुरक्षित निकाला था । कोरोना काल में ‘मिशन वंदेमातरम्' और मालद्वीप से भारतीयों को सुरक्षित लाने के लिए ‘सागर सेतु' अभियान चलाया जा रहा हैं । आज का भारत प्रवासी भारतीयों की सुरक्षित वापसी के लिए सैन्य क्षमताओं का उपयोग करने से भी संकोच नहीं कर रहा हैं । इस तरह के प्रभावी कदम प्रवासीयों में आत्मविश्वास और भावनात्मक जुडाव के साथ और मातृभूमि के प्रति गौरव का संचार करते हैं ।
मोदी डॉक्ट्रिन का विशिष्ट प्रभाव विदेशी मेहमानों के दौरों में भी दिखाई पड़ता हैं । मोदी युग से पहले भारत आने वाले विदेशी मेहमान राजधानी दिल्ली तक सिमटे रहते थे । अब दिल्ली के बाहर भारत के अन्य शहरों को भी इन विदेशी मेहमानों के दौरों में शामिल किया जाने लगा हैं । अहमदाबाद ,चेन्नई, बनारस, बेंगलुरु,पणजी,गुवाहाटी आदि नगरों से कई महत्वपूर्ण विदेशी अतिथियों ने अपने भारत दौरे का प्रारंभ किया । हाल ही में अमेरिका के राष्ट्रपति श्री डोनाल्ड ट्रम्प का स्वागत अहमदबाद में किया गया । इससे पहले चीन के राष्ट्रपति श्री शी जिनफिंग का स्वागत चेन्नई के पास महाबलीपुरम की सांस्कृतिक धरोहरो में किया गया था । इस तरह के आयोजन भारत की बहुसांस्कृतिक छवि को मजबूत करते हैं, वही पर्यटन को भी बढ़ावा देते हैं । प्रधानमन्त्री मोदी का विदेशी राष्ट्राध्यक्षो के साथ भव्य और सांस्कृतिक स्वागत से भरे हुए रोड शो का आयोजन अपने आप में अनूठा हैं । जापान के प्रधानमंत्री श्री शिंजो आबे कि अहमदाबाद यात्रा में और अमेरिकी राष्ट्रपति श्री डोनाल्ड ट्रम्प की भारत यात्रा में रोड शो का आयोजन किया गया था । इस तरह के रोड शो का आयोजन विदेश नीति के इतिहास में पहली बार दृष्टिगोचर होता हैं ।
इस तरह के आयोजनों का घरेलू राजनीति में भी अलग ही महत्त्व हैं । भारत में विदेशी संबंध और नीतियां चुनावों में उपयोगी ना होने के कारण सामान्यत: अपरिवर्तित रहती थी । विदेश नीति का आम जनता से भी सीधा संबंध नहीं होता है । परंतु श्री मोदी ने विदेश नीति के क्षेत्र में सरकार की सफलताओं को घरेलू राजनीति में प्रभावी उपयोग करना प्रारंभ किया । पहली बार विदेशी सफलताओं पर आम भारतीयों के बीच एक गौरव का भाव पैदा किया । विदेश नीति के घरेलू राजनीति में शामिल करने के दुष्परिणाम भी सामने आ रहे हैं । सरकार की विफलता को साबित करने के लिए कई बार अनपेक्षित विवाद पैदा हो जाते हैं । नागरिकता संशोधन कानून (CAA) सम्बन्धित विवाद इसी का परिणाम हैं । नागरिकता संशोधन कानून किसी की नागरिकता लेने का नहीं अपितु भारत कि नागरिकता देने का कानून हैं । इस अधिनियम के द्वारा अफगानिस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेश से 31 दिसंबर 2014 तक धार्मिक प्रताड़ना का शिकार होकर भारत आये उन देशों के धार्मिक अल्पसंख्यको को भारत कि नागरिकता में प्राथमिकता देने का प्रावधान किया गया हंक । इस कानून में धार्मिक अल्पसंख्यक समुदाय में हिन्दू ,सिक्ख, बौद्ध,इसाई और पारसी समुदाय को शामिल किया गया हैं । विदेश नीति के घरेलू राजनीति में प्रयोग ने इसे एक विरोध का विषय बना दिया । वोट की राजनीति के लिए CAA के पक्ष और विपक्ष में ध्रुवीकरण के प्रयास किये गए । जबकि इन राष्ट्रों में धार्मिक अल्पसंख्यको के साथ होने वाले अत्याचार किसे से भी छिपे नहीं हैं । अफगानिस्तान और पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों पर आये दिन हमले होते रहते हैं । भारत का यह नैतिक दायित्व हैं की पडौसी देशो के प्रताड़ित और शोषित धार्मिक अल्पसंख्यक वर्ग को संरक्षण प्रदान करे । कुछ लोग इसके धार्मिक आधार को लेकर विरोध कर रहे हैं । परन्तु धार्मिक अल्पसंख्यक और बहुसंख्यक वर्ग में अन्तर करना आवश्यक हैं ।
भारतीय परंपरा पडौसी राष्ट्रों के साथ शांतिपूर्ण विकास की रही हैं । पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी ने कहा था की हम इतिहास बदल सकते हैं, परन्तु भूगोल नहीं । श्री नरेन्द्र मोदी ने पडौसीदेशो के साथ शांतिपूर्ण सम्बन्धों को बढ़ावा देने के लिए पड़ोसी प्रथम (NE।GHBORHOOD F।RST ) की नीति को अपनाया हैं । 2014 में श्री मोदी ने शपथ ग्रहण समारोह में सार्क के सभी सदस्य देशों के राष्ट्राध्यक्षो को आमंत्रित किया था। इसी तरह अपने दूसरे कार्यकाल के शपथ ग्रहण समारोह में बिम्सटेक (B।MSTEC) राष्ट्राध्यक्षो को आमन्त्रित किया । स्वतन्त्र भारत कि विदेश नीति के इतिहास में यह एक अभूतपूर्व कदम था ।
प्रधानमंत्री बनने के बाद श्री नरेन्द्र मोदी ने पहले कार्यकाल की पहली विदेश यात्रा भूटान की थी । वहीं द्वितीय कार्यकाल में प्रथम विदेश यात्रा के लिए मालद्वीप गये । भारत पडौसी देशो के साथ शांतिपूर्ण सम्बन्ध और विकास में विश्वास करता हैं । प्रधानमंत्री श्री मोदी ने इसके लिए सामूहिक प्रयासों पर हमेशा बल दिया हैं । उन्होंने पड़ोसी देशों के साथ सीमा विवाद के समाधान के लिए निरंतर संवाद की नीति को आधार बनाया गया हैं । जिसका सबसे सुखद पहलू भारत बांग्लादेश सम्बन्ध हैं । 31 जुलाई 2015 को बांग्लादेश के साथ ऐतिहासिक समझौता करके 68 वर्ष पुराने सीमा विवाद को हमेशा के लिए समाप्त कर दिया गया हैं । इसी भांति म्यानमार के साथ भी सम्बन्धों को मजबूत आधार प्रदान करते हुए आतंकवाद के खिलाफ एक संयुक्त नीति विकसित की हैं । पूर्वोत्तर भारत में अलगाववाद और आतंकवाद के समाधान में मिली सफलता में विदेश नीति के मोदीत्व का ही योगदान हैं । हाल ही में म्यानमार ने 25 आतंकवादियों को भारत सरकार को सौंपा है । मोदीजी ने राष्ट्र प्रथम की नीति का अनुसरण करते हुए राष्ट्र की सुरक्षा के लिए सर्जिकल स्ट्राइक की नीति को अपनाया । भारत के इतिहास में पहली बार भारतीय सेनाओ ने सीमा पार कर विदेशी धरती पर स्थित आतंवादियों के शिविरों को नष्ट कर दिया । आतंकवादी गतिविधियों को नियन्त्रित करने के लिए सीमा पार कर पहली सर्जिकल स्ट्राइक म्यानमार की धरती पर की गयी थी । पाकिस्तान के खिलाफ उरी सर्जिकल स्ट्राइक और 2019 में बालाकोट की एयर स्ट्राइक इसी के प्रमाण हैं ।
नेपाल और चीन के साथ सम्बन्ध भारतीय विदेश नीति को सबसे बड़ी चुनौती हैं । नेपाल के साथ सरकारी नीति में भी निरंतरता और उदासीनता का अभाव रहा हैं । 2015 में नेपाल की आर्थिक नाकाबंदी करना भारत की एक बड़ी भूल थी । इसने नेपाल में चीन को प्रभाव बढ़ाने का मौका दिया । निवेश ,कर्ज और आर्थिक सहयोग के नाम पर नेपाल में चीन निरन्तर अपना प्रभाव बढ़ा रहा हैं । हाल ही में नेपाल ने अपना नया राजनेतिक नक्शा जारी किया हैं जिसमे भारत के लिपुलेख और कालापानी के क्षेत्र को नेपाल का हिस्सा बताया हैं । लिपुलेख और कालापानी का यह क्षेत्र भारत,चीन और नेपाल के बीच 32 किलोमीटर का क्षेत्र हैं जो रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं । भारत के लिपुलेख और कालापानी में मानसरोवर यात्रा के लिए निर्मित सड़क मार्ग के उदघाटन पर नेपाल कि प्रतिक्रिया आश्चर्य में डालने वाली हैं । नेपाल की इस प्रतिक्रिया ने कई प्रश्नों को जन्म दिया हैं ।प्राचीनकाल से ही नेपाल और भारत के सांस्कृतिक संबंध रहे है ।नेपाल को संकट के समय हमेशा भारत ने सहयोग दिया हैं । यह भी सत्य ही है की नेपाल एक भूमिबध्ध राष्ट्र हैं और भारत की भूमि से घिरा हुआ हैं । भारत और नेपाल के बीच सीमा विवाद का समाधान केवल बातचीत से ही संभव हैं । इससे पहले भी भारत और नेपाल ने बातचीत द्वारा 98% सीमा सम्बन्धित विवादो का समाधान किया हैं । इसलिए यथाशीघ्र उच्च स्तर पर बातचीत प्रारम्भ कर इसका समाधान निकालना होगा । बांग्लादेश के साथ सीमा विवाद समाधान को इसका आधार बनाया जा सकता हैं ।
प्रधानमंत्री बनने के बाद श्री नरेन्द्र मोदी ने पाकिस्तान के साथ सम्बन्धों को सुधारने के लिए लाहौर जाकर मित्रता का हाथ बढाया था । परंतु पाकिस्तान की भारत विरोधी आतंकवाद को बढ़ावा देने कि नीति ने इस पहल को नकार दिया । मोदी सरकार की स्पष्ट नीति है कि आतंकवाद और बातचीत साथ नहीं चल सकते हैं । परिणामस्वरूप अभी पाकिस्तान के साथ सभी तरह के संवाद बंद हैं । पाकिस्तान की आतंकवाद समर्थक नीति और दुष्प्रचार आज भारत के समक्ष एक बड़ी चुनौती हैं । मोदी सरकार ने कुशलतापूर्वक अंतराष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान को बेनकाब कर अलग- थलग कर दिया हैं । पाकिस्तान ने कश्मीर विषय के अन्तराष्ट्रीयकरण के सभी प्रयास असफल हो गए हैं । अब कश्मीर समस्या केवल पाक अधिकृत कश्मीर (POK) को मुक्त कराने की रह गयी हैं । संविधान की धारा 370 और 35A को समाप्त करके भारत की ऐतिहासिक भूलो को सुधारने का काम मोदी सरकार ने किया है । प्रधानमंत्री श्री मोदी कि विदेश नीति की सबसे बड़ी सफलता हैं की अब भारत प्रशासित कश्मीर का दुष्प्रचार हमेशा के लिए समाप्त हो गया हैं । कश्मीर को विकास की मुख्यधारा से जोड़ दिया गया हैं । 2014 से पूर्व जब भी पाकिस्तान से बात होती थी तो पाकिस्तान के परमाणु बम और उसकी धमकियां सबसे पहले आ जाती थी । परंतु मोदी नीति ने पाकिस्तान के परमाणु युद्ध की धमकियों को इतिहास बना दिया है । अब समय आ चुका हैं की पाकिस्तान के गैर क़ानूनी रूप से अधिकृत भारतीय क्षेत्र को मुक्त कराया जाय । भारतीय मौसम विभाग ने इस क्षेत्र के मौसम के पूर्वानुमान जारी करना प्रारंभ किया हैं । भारत को पाकिस्तान को नियन्त्रित करने के लिए चीन को पाकिस्तान से अलग करना जरुरी हैं । चीन के पाकिस्तान समर्थन का मुख्य कारण चीनी निवेश और असुरक्षा की भावना हैं । इसके लिए चीन के साथ बात की जा सकती हैं । भारत सरकार चीन को पाक अधिकृत कश्मीर में किये गए निवेश की सुरक्षा का आश्वासन दे सकती हैं । चीन की महत्वकांक्षी योजना ‘वन रोड वन बेल्ट' में भारत के शामिल न होने का मुख्य कारण इसका पाकिस्तान के गैर क़ानूनी कब्जे वाले भारतीय क्षेत्र में से होकर गुजरना हैं । भारत उस क्षेत्र को चीन को लीज पर देने और वन रोड वन बेल्ट परियोजना में शामिल होने का वायदा चीन को दे सकता हैं । कोरोना काल में विश्व में महत्वपूर्ण बदलाव आये हैं । पूरे विश्व में चीन की विश्वसनीयता कम हुयी हैं । इस अवसर का लाभ उठाया जा सकता हैं । चीन के द्वारा नेपाल को समर्थन या लद्दाख सीमा पर उत्पन विवाद के तार भी कहीं न कही पाकिस्तान से जुड़े हुए हैं । आशंकित चीन पाकिस्तान के गैर क़ानूनी कब्जे वाले भारतीय क्षेत्र पर भारत की किसी भी कार्यवाही को रोकने के लिए यह दबाव की नीति अपनाना रहा हैं । वही विश्व पटल पर भारत कि बढती स्वीकार्यता भी चीनी विरोध का कारण हैं । वर्तमान में चीन की लगी सीमा क्षेत्र में भारत ने आधारभूत ढाचा मजबूत किया हैं । 2017 में डोकलम विवाद के बाद से ही मोदी सरकार की नीति स्पष्ट रही हैं कि चीन के किसी भी दबाव में न आकर आँखों में आँखे डालकर जवाब दिया जाय । रामचरितमानस में लिखा हैं ‘भय बिनु होत न प्रीत' स्पष्ट हैं । चीन को रोकने में वार्ता के साथ सैन्य और आर्थिक शक्ति का विस्तार आवश्यक हैं ।
श्री नरेंद्र मोदी ने ‘लुक ईस्ट' की पुरानी नीति में बदलाव लाते हुये ‘एक्ट ईस्ट' की नीति को अपनाया हैं । आज आसियान देशो के साथ भारत के निकट के सम्बन्ध हैं । 2018 में आसियान के राष्ट्राध्यक्षो को गणतन्त्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप मं आमंत्रित किया गया था । वियतनाम ,दक्षिण कोरिया और जापान के साथ भारत ने सम्बन्ध बढ़ाकर चीन की साम्राज्यवादिता को नियन्त्रित करने का प्रयास कर रहा हैं ।
मोदी युग में भारतीय विदेश नीति यथार्थ के धरातल पर कार्य कर रही है जिसमे तुष्टीकरण की कोई जगह नहीं हैं । आज के दौर में खाड़ी के मुस्लिम देशों के साथ जितने निकट के सम्बन्ध हैं उतने निकट संबंध इतिहास में कभी नहीं रहे हैं । बहरीन ,संयुक्त अरब अमीरात (UAE),फिलिस्तीन, अफगानिस्तान, सऊदी अरब आदि मुस्लिम देशो ने अपने सर्वोच्च पुरस्कारों से श्री नरेन्द्र मोदी को सम्मानित किया हैं । मोदी सरकार की कुशल कूटनीति का ही परिणाम हैं की काश्मीर पर पाकिस्तान के लगातार दुष्प्रचार के बाद भी मुस्लिम देशों ने उसका समर्थन नहीं किया । तेल की गिरती हुई कीमतें, वैश्विक अनिश्चितता और अमेरिका की बदलती नीति ने नए अवसरों को पैदा किया हैं । भारत की बढ़ती हुई आर्थिक ताकत और बड़े बाजार ने विदेशी निवेश को आकर्षित किया है । परिणामस्वरूप सऊदी अरब , अमीरात जैसे इस्लामिक देशों ने अपना निवेश भारत की तरफ मोड़ दिया हैं । इसमें प्रधानमंत्री मोदी के कुशल प्रशासन और प्रभावी नेतृत्व का सर्वाधिक योगदान हैं । भारत के खाड़ी देशो के साथ मजबूत होते सम्बंधो में प्रधानमंत्री मोदी के इन देशो के राष्ट्राध्यक्षों के साथ मित्रतापूर्ण व्यक्तिगत सम्बंध आधार का कार्य कर रहे हैं । मोदी डॉक्ट्रिन की कुशलता का ही परिणाम हैं की खाड़ी देशो के साथ ही इजराइल भी भारत का विश्वस्त सहयोगी बना हुआ हैं ।
सोवियत संघ के बिखराव के बाद संयुक्त राज्य अमेरिका एकमात्र विश्व शक्ति रह गया हैं । एक ध्रुवीय विश्व में अमेरिका के साथ मधुर सम्बन्ध किसी भी देश के लिए महत्वपूर्ण हंह इस क्षेत्र में मोदी डोक्ट्रिन सफल रही हैं । आज भारत अमेरिका सम्बन्ध सर्वाधिक मजबूत हैं । भारत और अमेरिका के द्विपक्षीय सम्बन्ध ‘ग्लोबल स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप' में बदल गये हैं । भारत अमेरिकी सम्बन्धों का आधार ‘साझा प्रयास और साझा विकास' का आदर्श हैं । भारत को सैन्य आपूर्ति में अमेरिका की भागीदारी बढ़ रही हैं । भारत अमेरिका से LNG का आयात भी कर रहा हैं । भारत अमेरिका सम्बंधो को नए आयाम देने में प्रवासी भारतीयों की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही हैं । चीनी सागर में चीन कि बढ़ती साम्राज्यवादिता, अमेरिकी चीनी व्यापारिक प्रतिस्पर्धा ने अमेरिका को भारत के साथ निकट सम्बन्ध बनाए के लिए विवश किया हैं । भारत अमेरिकी सम्बन्ध अब बहुआयामी बन चुके हैं । भारत को अमेरिका अब मेजर रक्षा सहयोगी मानता हैं । भारत और अमेरिका के रक्षा और विदेश मंत्रालय के मध्य नियमित 2+2 संवाद हो रहा हैं । हिन्द प्रशान्त क्षेत्र में सामूहिक सुरक्षा और विकास के लिए भारत,जापान,अमेरिका और आस्टेलिया के मध्य चतुष्कोणीय संवाद आयोजित हो रहा हैं । जिसका मुख्य उदेश्य चीनी साम्राज्यवाद को नियन्त्रित करना है ।
प्रधानमन्त्री मोदीजी ने भारतीय विदेश नीति में संरचनात्मक सुधार किये हैं । जिसने सीमित क्षमताओं के बीच अंतरराष्ट्रीय राजनीति में भारत को एक प्रभावी भूमिका के लिए तैयार किया है । महत्वपूर्ण विषयों पर दृढ़ निश्चय, प्रभावी नेतृत्व, नेतृत्व की निर्णय क्षमता इस विदेश नीति का आधार हैं । जिसमे राष्ट्रीय हितो को सबसे अधिक बल दिया गया हैं । भारतीय विदेश नीति का मोदीत्व भारत के सभी नागरिको के विकास के साथ विश्व के उत्थान के लिए प्रयासरत हैं । इस नीति में भावनाओं के साथ यथार्थ का उचित सामन्जस्य दृष्टिगोचर होता हैं । इसमें तुष्टीकरण के लिए कोई स्थान नहीं हैं । मोदी विदेश नीति सशक्त ,समृद्ध और आत्मनिर्भर भारत के साथ विश्व समृद्धि और सहयोग के लिए कटिबद्ध हैं ।

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Comments

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    VIJAY NAITHANIREPLY

    पूर्ण सिंहावलोकन, जनचेतना तक ले जाने का प्रयास करते रहें ।

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    Dr. Anand KumarREPLY

    विदेश यात्रा करनेवाले भारतीय प्रधानमन्त्रियों में तीसरे क्रम पर आने के बावजूद मोदीजी विदेश में सबसे चर्तित और लोकप्रिय प्रधानमंत्री रहे लेकिन भारत में खोये आधार को खोजती विपक्ष के सर्वाधिक निंदा के पात्र. नए परिदृश्य में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी विश्व में एक चर्चित और सफल नेतृत्व देने की स्थिति में परिलक्षित होते दिख रहे हैं. मैं आपके विचारों से इस प्रकार सहमत दिखता हूँ.

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    दिनेश कुमार शर्माREPLY

    प्रिय हेमंत सर, आपका ये मोदी जी की विदेश नीति का जो सारगर्भित लेख है। बहुत ही महत्वपूर्ण है। यह लेख आपकी विदेश नीति की समझ को दर्शाता है इससे प्रतियोगी छात्र छात्राओं को फायदा मिलेगा। हमे उम्मीद है कि भविष्य में भी आपके महत्वपूर्ण विषयों ब्लॉग आते रहेंगे।

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    Rajnikant Sharma REPLY

    Thx Sir...

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    G d vyasREPLY

    सटीक और सारगर्भित जानकारी

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