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08-01-2019

बिना कोचिंग के प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कैसे करें

बिना कोचिंग के प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कैसे करें   

                                                                                                 Hemant Pandya

                   आज का युग प्रतिस्पर्धा का युग है। सीमित पदों की संख्या और आवेदकों की बढ़ती हुई संख्या नें प्रतिस्पर्धा को और अधिक बढा दिया है I प्रतियोगी परीक्षा की विज्ञप्ति आते ही  छात्र सामान्यत: कोचिंग सर्च करने लगते हैं I कई छात्र सोचते हैं कि बिना कोचिंग के एग्जाम क्लियर नहीं हो सकता I लेकिन वास्तविकता यह नहीं है I बिना कोचिंग के भी प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर सकते हैं और वांछित सफलता प्राप्त की जा सकती है I उसके लिए कड़ी मेहनत, निश्चित लक्ष्य और आत्मविश्वास और सही रणनीति आवश्यक है I बिना कोचिंग के प्रतियोगी परीक्षा में सफलता को सुनिश्चित करने में निम्नलिखित उपाय उपयोगी हैं -

(1) आत्मविश्वास :- सफलता का प्रथम सोपान स्वयं पर विश्वास या आत्मविश्वास हैं I आत्मविश्वास व्यक्ति को उन बुलंदियों पर ले जाता है,जो की सफलता के लिए आवश्यक है । यदि व्यक्ति अपने आप को समर्थ मानता है तो तैयारी का आधा मार्ग तो स्वत: प्रशस्त हो जाता है I

(2) उचित प्रेरणा आत्मविश्वास को बनाए रखने के लिए आवश्यक है Iप्रेरणास्पद आलेख,प्रेरणास्पद व्यक्तित्व सफलता की ओर व्यक्ति को प्रेरित करते हैं I समय-समय पर जो व्यक्ति तनाव या कई अन्य कारणों से सफलता से स्वयं को दूर प्राप्त करता है,उस समय प्रेरणास्पद कार्य जीत को सुनिश्चित करते हैं I अतः प्रतियोगी परीक्षार्थी को प्रेरणास्पद आलेख ,प्रेरणास्पद कविताएं और जीवन वृत्त स्वयं प्रेरित होने के लिए स्वाध्या करते रहना चाहिए I

(3) तनाव प्रबंधन और धैर्य -प्रतियोगिता के विभिन्न चरणों में लगने वाले समय और श्रम से तनाव उत्पन्न होता है I जोकि आत्मविश्वास को डिगा देता हैIअतः प्रतियोगी परीक्षार्थी को धैर्य के साथ तैयारी में विश्वास रखना चाहिए I उसको विश्वास होना चाहिए कि सफलता उसी की है बस धैर्य के साथ मेहनत की आवश्यकता है एकलव्य की तरह निर्धारित लक्ष्य की ओर निरंतर प्रयासरत रहना सफलता की गारंटी है।तनाव प्रबंधन के लिए योगा व्यायाम और उचित मनोरंजन भी आवश्यक है। यह क्रियाएं व्यक्ति को रिफ्रेश करके पुनः एकाग्र करने में सहयोगी रहती हैं।

(4) सिलेबस (पाठ्यक्रम) का विश्लेषण :- प्रतियोगी परीक्षार्थी आवेदन के समय ही  स्पष्ट रूप से ध्यान  रखना चाहिए कि वह किस पद के लिए आवेदन कर रहा है I उसका पाठ्यक्रम क्या है और उसके लिए किस तरह की रणनीति आवश्यक है I इस कार्य में विगत वर्षों के प्रश्न पत्र, घोषित सिलेबस और पुराने विद्यार्थियों के अनुभव महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं I परीक्षार्थी को प्रारंभ में ही पाठ्यक्रम को उचित तरीके से विश्लेषण करना चाहिए I टॉपिक वाइस सिलेबस का विश्लेषण कर अपने सबल और निर्बल पक्षों की पहचान करनी चाहिए I

(5) उचित रणनीति :- आजकल की प्रतियोगी परीक्षाएं ज्ञान कि नहीं अपितु योग्यता परीक्षण हैं। उचित रणनीति सफलता को सुनिश्चित करती है I उचित रणनीति के लिए स्वयं की योजना महत्वपूर्ण होती है जो कि अन्य के अनुभव, पाठ्यक्रम विश्लेषण और आत्मविश्वास से बनाई जा सकती हैं I  प्रतियोगी परीक्षाये चक्रव्यूह हैं Iजिनमे  अभिमन्यु की भांति  वीर व योग्य होते हुए भी चक्रव्यूह में फंसने  वाले योध्या की आवश्यकता नहीं है बल्कि अर्जुन बनने की जरुरत हैं I परीक्षार्थी को कलेक्टर (संग्रहण कर्ता) बनने की अपेक्षा वास्तविक परीक्षा उपयोगी ज्ञान की आवश्यकता होती है I खानवा के युद्ध में मेवाड़ के महाराणा सांगा की सेनाएं तो अधिक थी परंतु बाबर की रणनीति अच्छी थी जिसके कारण राणा सांगा पराजित हुए और बाबर विजयी रहा I प्रतियोगी परीक्षा रूपी चक्रव्यूह से  निकलने की जानकारी रखना पहली आवश्यकता है इसलिए हर किसी को अपनी स्वयं की रणनीति निर्धारित करनी चाहिए I

(6) विषय वस्तु का निर्धारण :- रणनीति में महत्वपूर्ण प्रश्न आता है कि क्यापढना है क्या नहीं पढ़ना I  मैं आप लोगों को सलाह देना चाहूंगा अधिक पढ़ने की अपेक्षा सीमित और वास्तविक स्वाध्याय सफलता को सुनिश्चित करते हैं I एक ही टॉपिक की 10 पुस्तकें पढ़ने की अपेक्षा एक टॉपिक को ही 10 बार पढ़ना अधिक बेहतर हैं I पढ़ाई करते समय प्रतिक्षण उद्देश्य याद रखना चाहिए कि हम परीक्षा में पास होने के लिए पढ़ रहे हैं I कई बार विद्यार्थी नोट्स बनाने के चक्कर में संकलन कर्ता का कार्य करने लगता हैं। और स्वयं ही अपने नोट्स में उलझने लगता है I प्रतियोगी परीक्षार्थी को उलझने की जगह सुलझने पर विश्वास करना चाहिए  I संग्रहण  की अपेक्षा परीक्षा उपयोगी विषयों को अध्ययन अधिक आवश्यक है।

(7) व्हाट्सएप ग्रुप मार्ग अवरोधक - कुछ परीक्षार्थियों का यह मिथ्या भ्रम होता हैं की गाइड सफलता की कुंजी है और कोचिंग सेंटर में पढ़ाने वाले बड़े-बड़े नाम सफलता को सुनिश्चित करेंगे I परंतु वास्तविक स्थिति यह है कि आज के युग में परीक्षा उपयोगी विषय-वस्तु हर जगह उपलब्ध है I व्हाट्सएप पर कॉपी पेस्ट के द्वारा भेजे गये ज्ञान की अपेक्षा प्रामाणिक ज्ञान का अधिक विश्लेषण करना चाहिए I व्हाट्सएप ग्रुप में प्रश्नों का निर्माण और तैयारी के लिए चर्चा करना मुझे पथभ्रष्ट करने का साधन लगता है I जिसमें अधिकांश चर्चा परीक्षा की तारीख, कठिन प्रश्नों को ढूंढने और अपने प्रश्न को सर्वश्रेष्ठ रखने की होती है Iजबकि अमूमन प्रश्न पत्र औसत होते हैं जिनका उद्देश्य ज्ञान परीक्षण नहीं अपितु योग्यता का परीक्षण करना हैंI व्हाट्सएप, फेसबुक  आदि की समूह चर्चा समय को बर्बाद करने के साधन हैं I प्रतियोगी परीक्षार्थी को ज्ञान बांटने वाला बनने या समूह में भागीदार बनने की जगह प्रामाणिक का वास्तविक पर तैयारी करना अधिक उपयोगी रहेगा।

(8) सभी विषयों का स्वाध्याय :- परीक्षार्थी को सफलता के लिए एक ही जगह एक ही विषय में या टॉपिक में खड्डा खोदने की अपेक्षा इंपॉर्टेंस के आधार पर विषय वस्तु की तैयारी करनी चाहिए I किसी भी विषय  को कम उपयोगी समझ कर नहीं छोड़ना चाहिए कई बार विद्यार्थी अपने कुछ निर्बल पक्षों को सफल बनाने का प्रयत्न नहीं करते I प्रतियोगी परीक्षा में कोई भी टॉपिक अनुपयोगी या कम महत्वपूर्ण नहीं होताI जिसे आप अनुपयोगी मान रहे हैं हो सकता है उसमें से आसान प्रश्न आ जाए और जिस टॉपिक में आपने पूर्ण मेहनत की है,वहां से  कठिन प्रश्न आ जाए, जो आपको नहीं आता है तो आप पिछड़ सकते हैं I चयनित टॉपिकके स्थान पर सभी विषयों का स्वाध्याय करना चाहिए।

(9) स्व मूल्यांकन और टाइम मेनेजमेंट  -परीक्षा की तैयारी का एक महत्वपूर्ण पक्ष स्वयं का मूल्यांकन होता है विगत वर्षों के प्रश्न पत्रों के अतिरिक्त समय-समय पर टॉपिक अनुसार  स्व मूल्यांकन के टेस्ट देने चाहिए I जिससे स्वयं की तैयारी का एहसास होता हैं और जहां-जहां सुधार अपेक्षित हो वहां सुधार किया जा सके I अधिकांश प्रतियोगी परीक्षाओं में प्रथम चरण वस्तुनिष्ठ या ऑब्जेक्टिव होता हैIजिसमें टाइम मैनेजमेंट महत्वपूर्ण होता है I टॉपिक वाइज टेस्ट सीरीज के द्वारा स्व मूल्यांकन किया जाना चाहिए I परन्तु प्रामाणिक टेस्ट सीरिज का ही प्रयोग किया जाना चाहिये I समय-समय पर दिए गए टेस्ट पेपर टाइम मैनेजमेंट के साथ साथ तनाव प्रबंधन का कार्य भी करते हैं तथा प्रतियोगिता की तैयारी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।प्रतियोगी परीक्षाओं में बारीक जानकारियां सामान्यतः करंट अफेयर से जुड़ी होती है करंट अफेयर्स एक दिन में नहीं बनता अभी तो एक लंबी प्रक्रिया का परिणाम है इसके लिए प्रतिदिन समाचार पत्र का अध्ययन स्वयं के नोट्स तैयार करने चाहिए ।

अंत में अधिक नहीं कहना चाहूंगा,परंतु यह सत्य है की एक लक्ष्य को तो साधा जा सकता है, परंतु एक साथ कई नावों पर पैर रखना स्वयं के लिए घातक होता है I स्पष्ट लक्ष्य,नियमित मेहनत और उचित रणनीति सफलता की गारन्टी हैं I केवल  दिवास्वप्न देखने से या बातों को करने से सफलता नहीं मिलती I सफलता के लिए नियमित 8 से 10 घंटे का स्वाध्याय आवश्यक है I इस समय का उचित प्रबंधन भी अनिवार्य है I परीक्षार्थी को समय सारणी बनाकर के प्रामाणिक पुस्तकों का अध्ययन करके,रणनीति के अनुसार तैयारी करनी चाहिए। इस पूरी प्रक्रिया में सर्वाधिक भूमिका परीक्षार्थी की स्वयं की होती है I सफलता आत्मविश्वास,रणनीति और परिश्रम इस त्रिवेणी का समन्वय है और यह तीनों चीजें परीक्षार्थी के स्वयं के वश में है ।


 

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hemant pandyaEducationist
INTERESTED IN SOCIAL,POLITICAL AND EDUCATIONAL MATTER

Comments

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    Vimla meenaREPLY

    Absolutely right and good motivational this line

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    Jagrati upadhyayaREPLY

    Nots 1st gread history chaiye sir ji

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    Garima AgrawalREPLY

    Absolutely right

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